Tuesday, March 8, 2011

एक फूल की कहानी...




यह कहानी है एक नाजुक से गुलाब के फूल की जिसने एक पोधे पर जन्म लिया और उस पोधे को मिलने वाले पानी और खाद से वह बड़ी हुई. कुछ दिनों के बाद मैंने देखा की वह सूरज की किरणों से और ज्यादा खूबसूरत लग रही है. उसकी खूबसूरती का एहसास भवरों को भी हो गया था; वह सब उसके आस पास मंडराने लग गए. गुलाब भी इस बात से खुश थी और अपनी खूबसूरती पर इतरा रही थी. धीरे धीरे उसकी पंखुड़ी मुरझाने लगी; दिन गुजरे और गुलाब की खूबसूरती कम होने लग गयी; भवरों का आना भी बंद हो गया. और एक दिन मैंने उस गुलाब को नीचे ज़मीन पर गिरा हुआ पाया. देखा लोग उसके ऊपर से उसे रोंध्ते हुए जा रहे हैं.

उसका जीवन तो फिर भी अच्छा था कम से कम वह अपनों के पास तो थी. उसकी सहेली जिसको उसके चाहने वाले ने पसंद किया और पसंद करते ही उसको डाल से अलग कर दिया. अलग करते वक़्त उस चाहने वाले को कुछ कांटे भी चुभे पर वह नहीं रुका; उसने गुलाब को पोधे से अलग कर ही लिया और उसे अपने घर ले गया. कुछ दिन उस गुलाब को संभल कर रखा; फिर धेरे धेरे गुलाब मुरझा गई; उसकी मीठी खुशबू भी ख़तम हो गयी; उसके बाद उस आदमी ने गुलाब को कचरे में फेक दिया. मैंने सोचा पहले वाले गुलाब का अंत तो अच्छा था; कम से कम अपनों के पास थी वह; दुसरे वाले के अंत में तो कोई नहीं था वह भी नहीं जिसने इतनी महनत करके उसे अपनों से अलग किया था.

हम लड़किया भी गुलाब की तरह नाजुक और कोमल होती हैं. जब तक खूबसूरत रहती हैं भावारे की तरह लड़के आस पास मंडराते हैं और जब खूबसूरती ढलने लगती हैं तो बहुत कम लोग होते हैं जिनको हम सच में अपना कह पाते हैं. वैसे एक ऐसा चाहने वाला मिल जाता है जो अपनी पसंद की लड़की को पाने के लिए कांटो से गुजरता है; शुरू में लड़की का बड़ा ख्याल रखता है; फिर धीरे धीरे चीज़ें बदल जाती हैं.

लड़की जो कभी शक्ति का रूप मानी जाती थी आज बस एक फूल जैसी नाजुक बन कर रह गयी हैं. और ज्यादातर अपनी परेशानीयों के लिए वह खुद जिमेदार हैं. एक औरत ही एक लड़की को जन्म नहीं देना चाहती; एक लड़की खुद अपनी शादी में अपने घर वालों को दहेज़ के लिए मना नहीं करती; और भी बहुत कुछ है जिसके लिए वह खुद जिमेदार हैं.... अब यह लड़कियों पर है की उन्हें फूल जैसा नाजुक और खूबसूरत बना है या सच में लड़की होने पर गर्व महसूस करना है.

12 comments:

pulkit said...

Story is awsome and realistic.......
but story ka saransh kuch clear nahi ho pa raha.....
BOYZ ARE NOT LIKE THAT.... EXCEPT FEW ONES


:(

Richa Ritwika said...

Its for the girls to stop worrying for outer beauty and look for inner beauty nahi toh gulab ke phool jaisa end honga... Baaki women's day hai toh thoda ladkiyon ke problem bhi share kar liye... :-)

Santosh said...

Very Nice Explain For The Girls.

Kass sare ladkiya ye sochte to aaj dahej ke jagah aacha jeevan sathi milta.

rach.. said...

its toooo too too gud :)
awesome
superb!!
way to go richa :)
u rock !!;)

rudransh said...
This comment has been removed by the author.
rudransh said...

Touching Richa..It was a Good message...good one :) I liked the line "ek ladki apne ghar walon ko khud dahej ke liye mana nhi karti" I liked this.
'very Good

Regards,
Rudransh

sumit said...

Awesome ...........awesome..........awesome.

sukanya sikdar said...

nice one richa di.....i completely agree wid the comparison dat u hav mentioned between a girl and a flower......
hum bolne k liye to bahut kuch keh dete hai......par i wonder how many girls still feel proud to b a girl....and kabhi yeh nahi boli hogi....k hum ladki hai yeh hamari bas ki baat nahi hai....ladkiyan kaam karne to lag gayi par abhi woh kisike upar dependent rehna pasand karti hai....jaise ki she dont trust her own abilities.....
and kuch aise ladkiyon k liye baki sab v generalized ho jate hai....

Banny said...

Nice story.....:)

sona said...

speechless:-)

manu shrivastav said...

kahani me koi jaan nahi hai... bas lekhak ke man me jo kuchh bhi aaya hai type kar diya. ise kahani nahi char alag alag paragraph kah sakte hain, jiska ek dusare se koi tal mel nahi hai. lekhak kya kahana chahata hai, use khud nahi pata. second last paragraph se lekhak ka frustration pratibimbit hota hai.

Aman's Blog said...

Superlike will be very less for this. Women say that they independant but actually they are not. Hope women can understand this